हम जुस्तजू में जी लिए, फुरकत में मर गए
अब क्या बताएं तुमको क्या उल्फ़त में कर गए
जब याद तेरी आई तो हमने बहाए अश्क
आया तू सामने तो क्यों मिलने से डर गए
सपनों से थी सजी ये कभी आँखें तो मेरी
तेरी वजह से यार ये अश्कों से भर गए
मेरी ही राह देख सितारे ये पूरी शब
होते ही जो सुबह यहां क्यों लौट घर गए
शायर वो बहुत ही तो मशहूर थे यहां
हज़रत वो सुनते हैं यहां कल रात मर गए
अनमोल