Anmol Sinha

हुए दूर फिर हम क़रीब आते-आते

हुए दूर फिर हम क़रीब आते-आते

बिछड़ने लगे तुम क़रीब आते-आते

 

बड़ी मुश्किलों से मनाया था तुमको

हुए फिर से बरहम क़रीब आते-आते

 

सताना मनाना ये अपनी जगह है

यूं रूठो न जानम क़रीब आते-आते

 

वो दिन थे कि फूलों पे शबनम सजी थी

क्यों बदले हैं मौसम क़रीब आते-आते

 

चले साथ मंज़िल के जानिब थे दोनों

कहां हम कहां तुम क़रीब आते-आते l

 

अनमोल