Waiting for Silence

तेरी बिंदिया कहाँ है

सुबह  तो  हुई  थी

चिडिया भी बोली थी

हवा भी चली थी

तुम क्यों चुप हो

 

पत्ते तो हँसे थे

फूल मुस्कुराया था

ओस भी गिरी थी

तुम क्यों उदास हो

 

चाँद   भी   पूरा है

तारे   भी सारे  हैं

बदली तो दिखती नहीं

तेरी बिंदिया कहाँ है

-विमल