Waiting for Silence

लगता  है   अब  तुम  आओगी

तुम  कह  देती  मैं  सुन  लेता

तुम  हंस  देती  में  खुश  होता

तुम  आजाती  मेरी  निंदिया  में

और  छू  लेती  मैं   जी  उठता

 

तुम क्यों  हो  मेरे  जीवन  में ?

तुम क्यों आयी हो इस मन में ?

क्यूँकर  मुझको मिल जाओगी ?

मुझको बस खोना आता है

 

दो  पल  सपनो  में  आ  जाना

मेरी  कविता  बन  जाएगी

साँसों में आँचल महक रहा

लगता  है अब  तुम आओगी

-विमल