नज़्म
मैं तेरे हिज्र से खुश हूं बहुत
न दिल में दर्द है, और न है क़रार कोई
न नफ़रत ही बची तेरे लिए अब दिल में
और न दिल में है तेरे लिए प्यार कोई
हां ये है कि अब अकेलापन सा है
मगर एक अजीब हल्कापन सा है
पहले दिल करता था तुझको याद बहुत
हां तेरे बाद अब ये है शाद बहुत
ये आँखें भी अब कम ही भीगतीं हैं
आजकल ये ख़्वाब कम ही देखतीं हैं
अश्क से अब ये आँखें नहीं डरतीं हैं
क्योंकि अब तेरा इंतज़ार नहीं करतीं हैं
हां तेरे बाद अब मैं बदल गया हूं
नयी सुबह की तरफ निकल गया हूं।
अनमोल