भारत का भविष्य
जिसको माता के आँचल में लोरी सुनकर के सोना था
भारतवर्ष का वो भविष्य चाय का प्याला धोता है
कल सोया था वो ख़ाली पेट इक प्याला था जो टूट गया
लातों ने भूख मिटाई थी आंसू से प्यास बुझाई थी
अरे कोई मुझको बतलाओ ये सबसे बड़ी समस्या है
क्यूँ नए राष्ट्र का निर्माता सड़कों पे सोया करता है?
हम कहाँ जा रहे हैं? किस ओर? ये कैसी अजब विडम्बना है?
जब हिंद भविष्य यूँ रोता है ये वर्तमान क्यूँ सोता है?
-विमल