दोस्त कोई एक लफ़्ज़ नही
क्या खो दूँगा क्या पाया था?तुमने क्या पाया खो दोगी?
ना मैंने तुमको जाना है , तुम भी सजनी अनजानी हो
वक्त बड़ा ही मरहम है , सब जी लेते हैं दुनिया में
तुम भी दो पल में भूलोगी , मैं भी तो शायद जी लूँगा
तुम सह लोगी वो आसां है , हर ओर सजन तेरे अपने हैं
मैं सह लूँगा की आदत है , अभी कल ही तो कुछ खोया था
मत समझाओ मुझको सजनी , अपनों ने ज़ख़्म लगाया है
हर कोई दोस्त नही होता , की दोस्त कोई एक लफ़्ज़ नही
-विमल