Waiting for Silence

दोस्त कोई एक लफ़्ज़ नही

दोस्त कोई एक लफ़्ज़ नही

क्या खो दूँगा क्या पाया था?तुमने क्या पाया खो दोगी?

ना मैंने तुमको जाना है , तुम भी सजनी अनजानी हो

 

वक्त बड़ा ही मरहम है , सब जी लेते हैं दुनिया में

तुम भी दो पल में भूलोगी , मैं भी तो शायद जी लूँगा

 

तुम सह लोगी वो आसां है , हर ओर सजन तेरे अपने हैं

मैं सह लूँगा की आदत है , अभी कल ही तो कुछ खोया था

 

मत समझाओ मुझको सजनी , अपनों ने ज़ख़्म लगाया है

हर कोई दोस्त नही होता , की दोस्त कोई एक लफ़्ज़ नही

                                           -विमल