Waiting for Silence
ख़ुशियाँ तू दो पैसे की होती तो मैं तुझको ले आता
कहाँ तलाशूँ मैं तुझको कौन जहाँ में पा लूँगा
कौन दिशा में बसती हो और कैसा रूप है तेरा बता
कितने बरसों से ढूँढ रहा कितना मैं तरस चुका हूँ अब
अब तो आजाओ तेरी मैं दिन रात प्रतीक्षा करता हूँ
कौन नगर में बस्ती हो कुछ अपना पता बता दो अब
ग़र दूकानों में बिकती हो मुझको वो जगह बता दो अब
तेरा कोई बीज अगर होता मैं खेती तेरी कर लेता
एकड़ दो एकड़ उपजा कर मैं दुनिया को खुश कर लेता
मेरा अंतर सूना है मैं तुझको खोजने निकला हूँ
हाँ बेहद टूट गया मैं अब तुम आकर गले लगा लो ना
कोई है? जिसने ख़ुशियों को देखा मुझको भी तो बतलाता
ख़ुशियाँ तू दो पैसे की होती तो मैं तुझको ले आता
-विमल