जो फूल गिरे मैने चुन लिए हैं
थोडा और हंसो कुछ और चुन लूं
बहुत देर हुई कुछ देखा नहीं
आजाओ बैठो तुम्हें देखलूं
रुक गयी है हवा क्या तुम छिपे हो
थोडा आँचल लहराओ हवा भी चले
ये भंवरे क्यों चुप चाप बैठे हुए
तुम गुनगुनाओ भंवरों का संगीत बने
ये दिल क्यों धड़कता नहीं अब मेरा
तुम छू लो मुझे मैं भी जी उठू
-विमल