Waiting for Silence

कसक

फिर एक नारी जला दी गई  मानवता पुनः नग्न हो गई

माँ भारती फिरसे घायल हुई राष्ट्र पर एक और कलंक लग गया

 

लग रही बोली नौजवानों की है  बिक रहे बेज़ुबान पशुओं से ये

है कौन सा विधान यहाँ मेरे प्रभु ये पशु ही फिर नारी पर जुल्म करेगा

 

पशु से भी गिरे इन पशुओं से पूछो  बोझ भारत पर इन कपूतों से पूछो

तुम्हारी नही है कोई बहन या बेटी ना होगी कोई वंश में

 

धिक्कार नौजवानों शत शत धिक्कार पौरुषहीन हो बिन बाजुओं के हो

मनु की संतान तुम हो नही सकते हे धरा के बोझ किसकी रचना हो

 

ये भूमि जहां प्रेम और सत्य प्रधान है होती जहां विचारों की उपासना है

यहाँ पर तो नारी देवी तुल्य पूज्यनीय है हे  सट्टों के दलाल कहाँ से आ गए हो

 

इन खुश दिखते बेटियों के पिताओं से पूछो किस बात पर इतने प्रसन्न हो रहे हैं

क्या सीढ़ी तुम्हें थोड़ी सस्ती मिली है  कितने में ठेका किया मौत का है

 

ये भूमि जहां राम पैदा हुए थे ये भूमि जहां कृष्ण फूले फले थे

ये भूमि जहां का महान इतिहास है कहाँ है वो भारत ही ईश्वर बता दे

 

हे गौरी तुम्हें आज क्या हो गया है करुणानिधि चुपचाप क्यूँ खड़ी हो

वो चण्डी का रूप एक बार और धर लो  माँ भारती आज फिर तुमको पुकारती

-विमल