रात घनी अंधियारी थी
मैं तारे देखा करता था
बाँहों में तुमको लेके मैं
जाने क्या सोचा करता था
सिसक सिसक कर रोई थी
सीने से लग के सोयी थी
मुझको तेरा आँचल छूता था
धीरे धीरे कुछ कहता था
तू प्यार ढूँढता था अबतक
तू देख तेरा ये जीवन है
इस बार कहीं खो जाए ना
साथ तेरे तेरी किस्मत है
एक कतरा आंसू दीखता था
आँखों के कोने बैठा था
मोती जैसा इठलाता था
जाने क्यूँ मुझे चिढाता था
ये आंसू हीरे मोती हैं
पीलो ये तेरे अमृत हैं
इसको यादों में रख लेना
बस इतना तेरा जीवन है
एक बाल तेरा मुझको बोला
इतना ना देखो इसको तुम
कहीं तेरी नज़र लग जाये ना
ये पहली बूँद ओस की है
फिर थोडी सी हवा चली
थोडी बिजली भी चमकी
तुम सिहर गयी मेरी बाँहों में
वो बाल छिप गया आँचल में
मैं सपने बुनता रहता था
पलकों से बातें करता था
तेरी साँसों की खुशबू में
तेरी धड़कन सुनता रहता था
यूँ रात बीत गयी खाबों में
सूरज की पहली किरण जगी
तुमने भी ले ली अंगडाई
मैं भी दुनिया में लौटाया
-विमल