Waiting for Silence

कहीं रोशनी मुझे दिखती है आज

कहीं रोशनी मुझे दिखती है आज


हाँ घना है बहुत ये कोहरा मगर
कहीं रोशनी मुझे दिखती है आज

रात लंबी है और बस शुरू ही हुई
पर सवेरा भी होगा, है वक़्त की बात


हम अकेले ज़रूर दिख रहे हैं अभी
देखते चंद साये हैं हम अपने साथ

रात कितनी भी काली हो, क्या फ़िक्र है
रोशनी उतनी ज़्यादा ही बढ़ जाएगी


राह में कुछ काँटे मिले थे मगर
सामने मुझको मंज़िल नज़र आती है

विमल