Waiting for Silence

पुकार

पुकार

बूढ़ा ये राष्ट्र हुआ है अब
हर ओर निराशा छायी है
भारत माँ के मुख पर फिरसे
गहन उदासी आयी है

पुत्रे कुपुत्र हुए इसके
आपस में ही लड़ मरते हैं
भूल रहे हर एक मौत
माता का दर्द बढ़ाती है

हे भारत के युवा वर्ग
हिंद तुझे देता पुकार
चल भूमि का उद्धार तू कर
माता तेरी तू उसका है

गर भारत है तो तू भी है
अस्तित्व हीन गर हिंद नहीं
मिटा स्वयं को माटी पर
मिट कर ही हिना रंग देती है

इतिहास तेरा गौरवशाली
देवों की तू संतान है
दे भारत को नवजीवन की
कल का भारत भी गर्व करे

जड़ता में चेतना ला दे तू
पत्थर को हे पिघला दे तू
तुझमें हिम्मत तुझमें धीरज
माता का कर्ज चुका दे तू

वक्त तेरा है तू उसका नहीं
ले चल इसको तू अपने संग
उठ हिम्मत कर तू आगे बढ़
इस देश का उन्नत मस्तक कर

— विमल