Waiting for Silence

हलचल

हलचल

ज़िंदगी में कौन ये आया
दिल में कैसा तूफ़ान लाया
स्तब्ध अँधेरी रात्री के साये में
कौन ये प्रकाश दीप बन के छाया

दी किसने तरंग तन में
मन क्यों अब मगन हो चला है
लेती है नाम धड़कन यूँ किसका
अखियों को इतना इंतज़ार क्यों है

आँख शर्मीली, सुर्ख़ गाल क्यों हुए
मन ने सपनों के जाल क्यों बुने
तन्हाई अच्छी क्यों लगने लगी
दिल इतना अब बेक़रार क्यों है

 

- विमल