Waiting for Silence

प्रतीक्षा

प्रतीक्षा

 

मेरे पाँव की एक ज़ंजीर न बन
मेरा संबल बन, मेरी ज्योति बन
मेरी मंज़िल मुझे बुलाती है
रास्ता मेरा मुझको देखे
आलोकित कर मेरे पथ को
आशा की एक तू किरण बन
मेरा संबल बन, मेरी ज्योति बन

 

कष्टों की काली रात रहे
घनघोर घुटा अँधेरा हो
तू चंदा बन, तू सूरज बन
विश्वास बढ़ा, मेरी शक्ति बढ़ा
पत्थर‑सा कर दे मेरा तन
मेरा संबल बन, मेरी ज्योति बन

 

गर डूब रहा हो तो नैया बन
गर दिशा‑हीन, पतवार चला
गर भूल रहा अपनी मंज़िल
पथ याद दिला, तू देवी बन
दुःख मिले मुझे, तू दुःख न कर
तू धैर्य धर, संतोषी बन
मेरा संबल बन, मेरी ज्योति बन

 

हुई रात अगर, दिन भी निकलेगा
विरह हुआ, मिलना भी होगा
मंज़िल न मिल पायी अगर
संयोग भी तब वियोग बनेगा
नहीं आज सफलता निश्चित कल
मेरे दीपक की तू शमा बन
मेरा संबल बन, मेरी ज्योति बन

— विमल