दोस्त
यारों से ख़फ़ा होते हैं अगर,
ख़ता माफ़ किया भी जाता है।
कोई भूल अगर होती है तो,
उसे भूला भी तो जाता है।
क्या अंतर है, क्या तुझको पता,
गैरों में, तेरे अपनों में।
अपनों की ख़ता को भूल सदा,
गैरों को भुला दिया जाता है।
रिश्ता मेरा है पाक सजन,
इतना मेरा विश्वास करो।
संगी तू फिर से गले लगा,
इतना तेरा विश्वास करूँ।
— विमल