दीपक
आँसू का तेल बनाया है
स्नेह की बाती डाली है
जीवन की शमा जलाता हूँ
मैं पूजा करने बैठा हूँ
तू देवी बन मेरी पूजा सुन,
मेरे दीपक की रक्षा कर।
बड़ी मुश्किल से है दीप जला,
कहीं दीपक ये बुझ जाए ना॥
पौधा
ये नन्हा पौधा आशा का
मैं रक्त से अपने सींच रहा।
विश्वास की मिट्टी डाली है,
मैं प्रेम का फूल खिलाता हूँ।
बड़ी आँधी इसने झेली है,
ये टूट‑टूट कर जमता है।
देवी, तू इसे सहारा दे,
इस बार कहीं मुरझाए ना॥
सजनी
बहुत अकेला हूँ सजनी,
तुझको मैं कब से ढूँढ़ रहा
मुझको तू मेरी खुशी दे दे,
देवी, मैं हँसना चाहता हूँ।
क्या तुमको दे दूँ मैं सजनी?
अपना सब कुछ तो दे डाला।
विश्वास मेरा कर लो सजनी,
ऐसा कि टूटने पाए ना॥
-विमल