फिर तेरी याद के शम्मों को जलाया हमने
इस तरह दिल के अंधेरों को मिटाया हमने
चाहे जो पूछ लो पर ये कभी भी मत पूछो
किस तरह से यहां तुमको है भुलाया हमने
जाने फिर किसने बताया है ये तूफानों को
आज फिर रेत से घर अपना बनाया हमने
क्यों मेरी हार पे तुम साथ हमारा छोड़े
तेरी हर हार पे है साथ निभाया हमने
तेरे ऐबों को सदा हमने छुपाया हमदम
तेरी हर भूल को सीने से लगाया हमने
अपने वादों को निभाया है यहां शिद्दत से
जो कहा तुझसे वो सब करके दिखाया हमने
हां बहाया है पसीने को भी पानी जैसा
तब कहीं यार ये घर अपना बनाया हमने
उम्र भर दर्द सहा जान तेरी उल्फ़त में
तब कहीं जाके है अश्कों को बहाया हमने
यार होकर भी जुदा है तो तु मेरा अपना
कब बता तुझको यूं समझा है पराया हमने
कहता रहता है हमें तु क्यों सितमगर अक्सर
यार हमको बता कब तुझको सताया हमने
हो न जाओ यूं ही बदनाम ज़माने में तुम
इस लिए नाम तेरा सबसे छुपाया हमने
और \'अनमोल\' कमाया नहीं दुनिया में कुछ
नाम थोड़ा है यहां अपना कमाया हमने।
अनमोल