अकेला मगर मैं बहुत खुश हूँ
साथ नहीं है कोई आज तो क्या हुआ
मेरा साया दिखता है हरदम मुझे
बात हमसे नहीं कोई करता तो क्या
ये धड़कन तो मुझसे बहुत कुछ कहे
अपनी किस्मत नहीं साथ देती तो क्या
बदक़िस्मत तो वादा निभा जाती है
गर किसी से नहीं जीत पाते हैं हम
हारने में मज़ा हमको आता है अब
ज़िंदगी तुम नहीं साथ दे पा रहे
मौत ने तो किया एक वादा मुझे
कौन हो तुम, कहाँ हो, चले आओ अब
तुम मेरी परीक्षा न ले पाओगे
तुम क्या सोचते हो कि नादान हैं
अश्क़ नहीं हैं तो रक्त ही बहा लेते हैं
सोचता हूँ कि कुछ देर रुक लूँ अभी
इक बार तो वफ़ा किस्मत हमसे करे
मैं इतना लुटा क्या फ़लक से डरूँ
हूँ अकेला मगर मैं बहुत खुश हूँ
— विमल