यार, यारों से कभी नाराज़ नहीं होता
मज़हब है नहीं इसका, नहीं कोई जाति है इसकी
नहीं कोई भेद है इसमें, नहीं कोई शर्त है इसकी
ये रिश्ता पाक है मेरे यार, करो विश्वास तुम मेरा
दिलों की बात सुन, तू संगी बन, मैं संगी हूँ तेरा
ख़ता है गर मेरी तो माफ़ कर, कुछ बात ही कहते
कि यारी पर हमें है नाज़, कि यूँ ख़फ़ा नहीं होते
परेशान हूँ बहुत मैं यार, बस एक शेर हूँ कहता
ये सच है यार, यारों से कभी नाराज़ नहीं होता
— विमल