Waiting for Silence

होली है.....

होली है.....

 

रंग लाल उड़ा जब चारों ओर, रंगीला कुर्ता धोती है
तब कहो सभी मिलकर यारों, आई फिर से होली है
 

पकड़ो पकड़ो अरे भाग गया, देखो वो देखो निकल गया
अब कहाँ जाओगे बच्चू जी, शामिल हो जाओ टोली में
 

कहीं खोवों की कहीं मेवों की, कहीं सूजी की और बेसन की
कहीं बड़ी बड़ी कहीं छोटी भी, गुझिया लाए ये होली है
 

रस भरा  माल पूआ भाया, कहीं तीखे सेवों को खाया
उठ गई तरंग हिया में जब, रंग चढ़ा भंग का होली में
 

तुम लाला हो या खत्री हो, पंडित हो या फिर क्षत्री हो
नहीं कोई भेद इस होली में, हैं सभी एक इस होली में
 

तुम क्यों हो सबसे दूर खड़े? मतभेद हुआ क्या लोगों से?
लग जाओ गले एक दूजे के, अरे भई आज तो होली है
-विमल