सर पर हमारे छत हो ये किस्मत नहीं रही
ख़ैर ऐसी कोई अब मेरी हसरत नहीं रही
मिल जाये तेरा प्यार ये ख्वाहिश कभी जो थी
अब दिल में ऐसी कोई भी चाहत नहीं रही
पहले था मय का, जाम का हमको भी शौक पर
अब ऐसी अपनी भी तो वो तबियत नहीं रही
दिल मेरा प्यार में तो ये टूटा है इस कदर
अब फिर इसे लगाने की ताक़त नहीं रही
ऐ दोस्त हम कभी थे हाँ पागल तेरे लिए
पर अब तेरी वो पहली सी सूरत नहीं रही।
अनमोल