Anmol Sinha

सजने लगा आंखों में कोई ख़्वाब आजकल

सजने लगा आंखों में कोई ख़्वाब आजकल

खिलने लगा दिल में भी कोई गुलाब आजकल

 

पहले बहुत ख़त लिखे पर कुछ हुआ ही नहीं

आने लगा उनका भी पर अब जवाब आजकल

 

मत पूछ क्या हाल है उनके बिना अब यहां

तबियत हमारी भी रहती है ख़राब आजकल

 

हर गाम पर लगता है क्यों तुम हो नज़दीक अब

मंज़र ये होने लगे हैं सब सराब आजकल

 

बिछड़ा है \'अनमोल\' जबसे तुझसे फिर ये हुआ

पीने लगा है वो भी अब बेहिसाब आजकल।

 

अनमोल