Anmol Sinha

तुम्हारी याद के बादल ज़हन में छा गए फिर से

तुम्हारी याद के बादल ज़हन में छा गए फिर से 

लो अब मौसम उदासी के मेरे घर आ गए फिर से  

 

बहुत मुश्किल से निकला था मैं अपने इस ग़म-ए-दिल से 

और एक तुम हो तराने इश्क के क्यों गा गए फिर से  

 

यहां मैं तो तुम्हारी खैरियत की चाह रखता हूं 

और एक तुम हो नया एक ज़ुल्म मुझपे ढ़ा गए फिर से  

 

कि कब हम तुमसे बरहम थे ऐ हमदम ऐ मेरी जाना 

क्यों फिर तुम आज झूठी कसमें मेरी खा गए फिर से  

 

कि अपना नाम तेरे लब से सुनकर यूं लगा हमको 

हम अपने खोए सारे चैन को अब पा गए फिर से।  

 

अनमोल