Anmol Sinha

किसी ने देखा तो नहीं तुझको यहाँ आते हुए

किसी ने देखा तो नहीं तुझको यहाँ आते हुए

तुम्हें इन फूलों को यहां मेरे लिए लाते हुए

 

तुम्हें अब कैसे मैं मोहब्बत का कोई खत ही लिखूं

हैं ये बातें राज़ की, डर लगता है बताते हुए

 

कि यहां दी छोड़ ये दुनिया सिर्फ तुम्हारे लिए

न तरस आया तुझे अब हमको यूं सताते हुए

 

कभी तुम्हारा भी इरादा वापसी का नहीं था

हुई है मुद्दत मुझे फिर तुझको भी बुलाते हुए

 

कभी हमने भी जो बसाया वो जहां साथ यहां

उसे हम कैसे चले जाते यूं ही जलाते हुए

 

ये नहीं है बात कि दिल को अब वफ़ा रास नहीं

हुई मुद्दत अब हमें तुझसे दिल को लगाते हुए।

 

अनमोल