Anmol Sinha

तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे

तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे

खोजी तुझे नज़र न कहीं तु मिला मुझे

 

ता उम्र जैसे मुझको भी तेरी तलाश थी

फिर शाम और सहर न कहीं तु मिला मुझे

 

सोचा कि देख लूं तुझे मैं तेरे घर ही में

देखा जो तेरे घर न कहीं तु मिला मुझे

 

कुछ ऐसे तु यहां जुदा मुझसे हुआ कि फिर

आई तेरी ख़बर न कहीं तु मिला मुझे

 

चलते हुए मैं संग जो तेरे रुका यहां

फिर मेरे हमसफ़र न कहीं तु मिला मुझे।

 

अनमोल