Anmol Sinha

कब कहा तुझसे कि मेरी तु पज़ीराई कर (Ghazal)

कब कहा तुझसे कि मेरी तु पज़ीराई कर

हां मगर दोस्त मेरी यूं तो न रुसवाई कर

(पज़ीराई: आदर/स्वागत)

 

कर्ज़ तन्हा वो जो रातों का अभी है तुझपर

बैठ जा साथ मेरे उसकी तो भरपाई कर

 

चाहे तो छोड़ के मुझको चला जा अब हमदम

पर यूं मुझपे न सितम ऐ मेरे हरजाई कर

 

एक बस तू ही मसीहा है यहां अब मेरा

मेरी मरती हुई धड़कन पे मसीहाई कर

(मसीहाई: मृतक को जीवित करने की शक्ति)

 

दस्तरस से ये वफ़ा तेरी न बाहर हो अब

इस वफ़ा में तो न अब तू यूं महंगाई कर।

(दस्तरस: पहुंच/नियंत्रण)

 

अनमोल