Dog days

The same old lanes

जब साँस लेने को

बाहर निकलता हूँ—

 

तो यक़ीन होता है

 

ये दुनिया

कहाँ से कहाँ

पहुँच गई

और हम वहीं

उन गलियों में

घूमते रह गए