सफ़र-ए-हयात में
आज किसी तक़रीब के मौक़े पर
फिर उनसे हुई मुलाक़ात
और फिर एक दफ़ा
कह न पाए हम
दिल के आँगन में खिली-पली
छोटी-सी ये बात