खो चुका हूं मैं हक़ भी ख़फा होने का

Anmol Sinha

खो चुका हूं मैं हक़ भी ख़फा होने का

शायद अब आ गया वक्त जुदा होने का

 

शायद वक्त उसका अब ढलने लगा है

जो हुआ उसको गुमान खुदा होने का

 

ये है खेल दिलों का ज़रा सम्भल जाना

मौका ज़रा कम होगा नफ़ा होने का

 

अपनी सब ख्वाहिश मैं दफ्न कर आया

और सबूत क्या घर में बड़ा होने का

 

अपने लोग ही आँखें चुरा लेते हैं

तब पता चलता है वक्त बुरा होने का

 

क्या 'अनमोल,' है नाम मेरा लिखा उसमें

कोई तो राज़ है पन्ना मुड़ा होने का I

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: January 1st, 2026 02:40
  • Category: Unclassified
  • Views: 7


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