उसके दिल में समा रहे हैं हम
अब क़रीब और आ रहे हैं हम
फिर न होंगे यहां मयस्सर अब
इस जहां से ही जा रहे हैं हम
था जो बोया कभी यहां हमने
अब वही सब को पा रहे हैं हम
उसका दिल रखने के लिए देखो
झूठी कसमें भी खा रहे हैं हम
देख ले तू तेरी मोहब्बत में
क्या क्या सदमे उठा रहे हैं हम
तुझसे वाबस्ता आंखों में अब
नए सपने सजा रहे हैं हम
देख 'अनमोल' ये ग़ज़ल लिखकर
तुझको वापस बुला रहे हैं हम।
अनमोल
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Author:
Anmol (Pseudonym) (
Offline) - Published: January 18th, 2026 10:47
- Category: Unclassified
- Views: 0

Offline)
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