मैं जानता हूं बनाओगे बहाने क्या क्या

Anmol Sinha

मैं जानता हूं बनाओगे बहाने क्या क्या

मैं जानता हूं सुनाओगे फसाने क्या क्या

 

मैं एक शायर हूं अदना सा बहुत अदना सा

जाने क्यों लगते हैं वो मुझको बुलाने क्या क्या

 

हम उनके नज़दीक आए थे सुलह करने को

वो लग गए याद अब मुझको दिलाने क्या क्या

 

मैं कल यूं ही जो पुराने कमरे में था गया

अनजाने ही हाथ आए हैं ख़ज़ाने क्या क्या

 

चाहा यहां मैंने था प्यारा सफर प्यार का

तुमने दिखाएं हैं उल्फ़त के ज़माने क्या क्या

 

अब इज़्ज़त-ओ-आब है 'अनमोल' उस शहर में

मारे जहां लोगों ने उसपे भी ताने क्या क्या।

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: January 25th, 2026 06:53
  • Category: Unclassified
  • Views: 0
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