मैं जानता हूं बनाओगे बहाने क्या क्या
मैं जानता हूं सुनाओगे फसाने क्या क्या
मैं एक शायर हूं अदना सा बहुत अदना सा
जाने क्यों लगते हैं वो मुझको बुलाने क्या क्या
हम उनके नज़दीक आए थे सुलह करने को
वो लग गए याद अब मुझको दिलाने क्या क्या
मैं कल यूं ही जो पुराने कमरे में था गया
अनजाने ही हाथ आए हैं ख़ज़ाने क्या क्या
चाहा यहां मैंने था प्यारा सफर प्यार का
तुमने दिखाएं हैं उल्फ़त के ज़माने क्या क्या
अब इज़्ज़त-ओ-आब है 'अनमोल' उस शहर में
मारे जहां लोगों ने उसपे भी ताने क्या क्या।
अनमोल
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Author:
Anmol (Pseudonym) (
Offline) - Published: January 25th, 2026 06:53
- Category: Unclassified
- Views: 0

Offline)
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