प्यारा मेरा देश महान सारे जहाँ में हिंदुस्तान
मौर शीश पर पर्वत‑राज हिमालय चमका करता है
चरण वंदना लंका इसकी सागर जल से करता है
ऋतुएँ सारी धरा पर इसकी आकर क्रीड़ा करती हैं
आकर इसकी भूमि पर गौरव का अनुभव करती हैं
पावन गंगा, यमुना, सतलुज कल‑कल झर‑झर बहती हैं
निर्मल, शीतल, उज्ज्वल जल से हर मानव को तरती हैं
कोस‑कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी भी
करते चकित धरा पर सबको, रहते हैं मिलकर सभी
राम‑कृष्ण की लीला को इसकी माटी ने देखा है
सीता‑सावित्री के इसने सती बल को भी परखा है
राणा प्रताप और शिवा वीर ने धरा पर इसकी जन्म लिया
अहिंसा के साधक अशोक के होने का इसने गौरव लिया
महावीर और बुद्ध, विवेकानंद विचारक यहाँ हुए
यहीं कबीर, रहीम, तुलसी ने नीति के उपदेश कहे
नाम अमर कर गई देश का, ऐसी भी एक देवी थी
महाविदुषी गार्गी भी तो भारत की ही बेटी थी
दूर गुलामी को करने को अपने मन में ठानी थी
भरी जवानी मिटी इसी पर लक्ष्मीबाई रानी थी
था एक वीर सिपाही, केवल इक लंगोट पहनता था
देख गुलामी भारत की, दिन‑रात तड़पता रहता था
उसी बहादुर गांधी जिसने माँ की बेड़ी काटी थी
दूध पिलाने वाली उसको भारत माँ की छाती थी
मिट गए, आन नहीं छोड़ी, उस आज़ाद को इसने जन्म दिया
इसकी पावन भूमि पर ही वीर सुभाष ने जन्म लिया
“जय जवान और जय किसान” कहने वाला बेटा था
लाल बहादुर भारत माँ की गोदी में ही खेला था
जन्म यहाँ लेकर हर मानव धन्य‑धन्य हो उठता है
इसकी पावन भूमि पर गौरव का अनुभव करता है
अहो भाग्य जो जन्म लिया, गर्व इसी पर करता हूँ
कर सकूँ एक छोटी सेवा, बस यही इच्छा रखता हूँ
करूँ प्रार्थना देना मत मोक्ष मुझे हे ईश्वर तुम
बारम्बार जन्म लेने का मौका मुझको देना तुम
- विमल
-
Author:
विमल (Pseudonym) (
Offline) - Published: April 18th, 2026 05:18
- Category: Unclassified
- Views: 4
- Users favorite of this poem: Priya Tomar
- In collections: General.

Offline)
Comments2
I 'm proud to be Indian .
Great poem .
🙏
Thank you.
A beautiful write from Hindu perspective reflecting the culture and religious views of reincarnation and different aspects of the gods. Nicely written in reverence of the land of India.
Thank you
You are most welcome
To be able to comment and rate this poem, you must be registered. Register here or if you are already registered, login here.