प्रार्थना
नहीं चाहिए कोई सुख
नहीं चाहिए कोई मान
माँ मुझपे तू कृपा करदे
बन जाऊँ मैं एक इंसान
नहीं फूल की मुझे ज़रूरत
काँटों से है मुझको प्यार
बिना चुनौती क्या है जीना
जीवन है वो मृत्यु समान,
हे दुर्गे दे दे वरदान
बन जाऊँ मैं वीर जवान
दिन सप्ताह महीने सालों
डिगूँ न चाहे हो तूफ़ान
लहराता तुझमें करुणा का
सागर दया निधि गौरी
कुछ बूँदें तू मुझको देदे
बाँट लूँ थोड़े दुख में भी
हे माँ करदे वीणा वादन
दे दे मुझको कुछ स्वर दान
मेरे दिल की इच्छा सुनले
कर देवी तू विद्या दान
— विमल
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Author:
विमल (Pseudonym) (
Offline) - Published: April 23rd, 2026 01:37
- Category: Unclassified
- Views: 3

Offline)
Comments2
A lyrical hymn.....
Nice .
Thank you
A poetic prayer to the gods and goddesses for gifts to guide one through this life. A lovely write
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