मेरा जीवन – मेरा अनुभव
एक चाह मिली, नई राह चला,
पग‑चार चला, कुछ मोड़ मिले।
कुछ छूट गए, कुछ छोड़ दिए,
कुछ सीख मिली, कुछ सीख लिया॥
कभी कष्ट मिला, कभी ठोकर भी,
कभी संभल गया, कभी चोट लगी।
नहीं रुका कभी, चलता ही गया,
गिर‑गिर कर फिर उठता ही गया॥
अब तक जीवन में अनुभव से
कुछ सीख लिया, कुछ जान लिया।
कुछ सोच‑विचार किया मन में,
कुछ ठान लिया इस जीवन में॥
कभी कहो नहीं जो दिल में हो,
करके दिखलाओ, समय मिले।
तलवार बनी पहचान सदा,
वाचाल भला क्या वीर हुआ॥
खुश दिखो अगर संताप में हो,
मत घबराओ कुछ कष्ट में हो।
ठंडे दिल से हँसते‑हँसते
करो दूर कष्ट तुम जीवन के॥
कभी कहो नहीं अपना दुख तुम,
दुख देख हमेशा हँसते हैं।
हट जाते देख तमाशा सब,
कभी लोग मदद नहीं करते हैं॥
मत अवसर खोना जीवन में,
विरले कोई यह मिलता है।
पर याद रखो, गर चूक गए,
मौका हर बार नहीं मिलता है॥
मत भेद रखो कुछ साथी से,
दुख में जो साथ निभाता है।
हँसता जो देख तुम्हारी हँसी,
दुख में तेरे जो रोता है॥
पर मान करो उस बैरी का,
विद्वान जो हो और काबिल में।
सुख के मित्रों से लाख भले,
एक लायक शत्रु होता है॥
मत करो बुराई किसी की तुम,
कोई बात नहीं, ये मुश्किल है।
दिलदार तभी कहलाओगे,
तारीफ़ करो जब दुश्मन की॥
कर सकते मदद किसी की तुम,
भरपूर करो, तन‑मन से करो।
पर एक बात ज़हन में रहे,
हर मदद बिना आशा के हो॥
कभी कहो नहीं तुम दुश्मन को,
क्या करने को अब ठाना है।
विश्वास कभी न होने दो,
कि शत्रु उसको माना है॥
कभी कहो नहीं उसने क्या दिया,
क्या दिया है तुझको जीवन में।
सोचो, जोड़ो तुम धीरज से,
क्या तुमने किया, क्या तुमने दिया॥
कोई काम अगर तुम करते हो,
सबसे तुम अवश्य सलाह करो।
एक बात सदा रखो दिल में,
कि निर्णय स्वयं तुम्हारा हो॥
गर कल असफल तुम हो गए तो
सब हाथ झाड़ हट जाएँगे
भुगतोगे अपनी करनी को
नहीं साथ किसी को पाओगे
कोई बात किसी से कहनी हो
दस बार विचार करो मन में
भूले तीर चूक जाए पथ से
कड़ी बात हृदय को बींधती है
गर लग जाए पीछे ही कभी
दुर्भाग्य तुम्हारे जीवन में
मत उससे लड़ना जीवन में
समझौता उससे करना तुम
कभी मौका भाग निकलने का
मिल जाए कभी मत रुकना तुम
इक बात सदा ही ध्यान रहे
नहीं हँसना कभी किसी पर तुम
कल के कामों को आज करो
मत टालो काम कभी आगे
नहीं राह समय ने देखी कभी
चलता रहता नहीं रुकता कभी
अपने कामों को स्वयं करो
मत कहो किसी से करने को
जब तक वो समय निकालेगा
वक्त आगे कुछ हो जाएगा
इतना कुछ सीखा जीवन में
सोचा करता दिन रात मगर
नहीं चाह मिली क्या हानि हुई
इतना सीखा अनमोल नहीं?
— विमल
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Author:
विमल (Pseudonym) (
Offline) - Published: April 26th, 2026 00:19
- Category: Unclassified
- Views: 4
- Users favorite of this poem: Tristan Robert Lange

Offline)
Comments3
Beautiful sayings of wisdom that fall like pearls on a necklace
Vimal, my friend, this reads like a life gathered into reflection…every step, every lesson, carried forward. That sense of learning as you go…sometimes through pain, sometimes through clarity…feels grounded and true. It stays with you. Really well done. 🌹🖤🙏🕯️🐦⬛
My friend, this reads like a life gathered into reflection…every step, every lesson, carried forward. That sense of learning as you go…sometimes through pain, sometimes through clarity…feels grounded and true. It stays with you. Really well done. 🌹🖤🙏🕯️🐦⬛
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