अकेला नहीं हूँ
साथ मेरा नहीं कोई देता तो क्या
मैं चला हूँ ज़माने को दामन लिए
गर मुझको नहीं कोई राह है मिली
मैं बनाता नई राह सबके लिए
छोड़ो कल क्या हुआ, देखो आगे है क्या
उस काले अतीत को मिटा देंगे हम
मेरा साथ दो, है ये रास्ता कठिन
नई रोशनी का दीपक जला देंगे हम
है ये वादा नया, कल बना दूँगा मैं
मेरी मंज़िल बहुत पाक है साथियो
मेरा अपना लहू, जो कि मेरा नहीं
मेरा सपना मेरा है, मैं अकेला नहीं
— विमल

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Comments1
A poetic expression of a shared path in life. Nicely written
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