जेब (नज़्म)

Anmol Sinha

जेब (नज़्म)

तुम मेरी जेब देखकर ही तो आई हो मेरे पास

इस जेब में कुछ चंदा हैं सितारे हैं इसलिए

वरना किसी फकीर से क्या लेना है तुम्हें 

वरना तुम मेरे दर पे आओगी किस लिए

 

छन छन छनकती जेब की पाज़ेब ज़रा सुन

क्या कहती है तुझसे मेरी जेब ज़रा सुन

मुझपर मां की दुआओं का भी हक़ है

मुझपर पिता की दवाओं का भी हक़ है

 

ये प्यार, ये मोहब्बत सब इसके दम पे है

घरों की भी ज़ीनत सब इसके दम पे है

जब इसके छेद से कुछ सिक्के जो गिर गए

क्यों चाहने वालों के चेहरे उतर गए

 

तुमने भी मुझसे पहले इसे प्यार किया है

इसको भारी जानकर ही तो इक़रार किया है

आज खाली जेब की वो सूरत नहीं रही

इसलिए तुम्हें मेरी ज़रूरत नहीं रही।

 

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: June 5th, 2026 20:24
  • Category: Love
  • Views: 1
Comments +

Comments1

  • sorenbarrett

    Is everything a money thing? Nicely written



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