आज का दिन बड़ा ख़ास है
क्योंकि आज मेरा जनम हुआ था,
खानदान खुश हुआ जैसे
मैं नतीजा उनके सारे मन्नत, कर्म-दुआ का।
देखा जाए तो आज उम्र बढ़ी है मेरी
या फिर, मेरी ज़िंदगी घटी है,
आशा है कि अब खुशी-आराम से कटे ज़िंदगी
क्योंकि आज तक ,तो बड़ी ऊँच-नीच से कटी है।
पर ज़िंदगी हमेशा कहाँ स्थिर रहेगी?
उसका स्वभाव है ऊपर-नीचे होते रहना,
आख़िर आलस भी तो सबको दिनभर आता है
क्या इसका मतलब है दिनभर सोते रहना?
कितना अजीब है न आज का दिन?
आज हर कोई अदब से पेश-आता है।
हँसाने वाला, तो हँसाता ही है
पर रुलाने वाला भी, आज न रुलाता है।
दिन है कटता खुशी से
खाने को मिलते अच्छे पकवान,
इतनी इज़्ज़त करते हैं लोग आज
मानो, किया न कभी कोई अपमान।
नई पीढ़ियाँ, नई रीतियाँ, शाम का इंतज़ार होता है
जब होता जश्न, फिर कोई पुस्तक देता उपहार में, कोई देता चित्र,
पर असल उपहार मेरी ज़िंदगी के हैं
बचपन से साथ निभाने वाले मेरे मित्र।
अब तक तो खुशी थी, पर अब एक आवाज़ से आँख खुली है
देखा की दिनांक वही है, पर रात नहीं, अभी दिन हुआ है,
याद आया कि आज और बड़ा हो गया, अकेला रहता हूँ
जब यह याद आया, तो मेरा दिल छिन्न-भिन्न हुआ है।
अब उठूँगा, बस्ता पकड़ूँगा, और जाऊँगा दफ़्तर
दिन कोई भी हो,काम से बड़ा न कोई सनम है,न कोई सनम हुआ था ,
पर फिर भी, किसी चमत्कार की प्रतीक्षा में हूँ
क्योंकि कुछ तो ख़ास है आज , आज मेरा जनम हुआ था।
— दिव्य डनसेना
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Author:
Divya Dansena (
Offline) - Published: July 3rd, 2026 09:13
- Comment from author about the poem: I’m alone No one wished me Or I can say that “I” am not capable to be the recipient of any wishes Today 3 July is my bday And it’s a normal day for me 😭
- Category: Sad
- Views: 2
- In collections: दिल से निकले , मुस्कुराते लफ़्ज़ ।।.

Offline)
Comments1
I wish no one celebrates a birthday like me
. Happy belated or advance birthday to all of you reading this . I can bear this . It normal .
🥺😢😭😖😣☹️😫😔🙁😕
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