तुम हार मत मानना
हार कोई विकल्प नहीं,
जो हार गए तुम
अर्थात मन में जीत का संकल्प नहीं।
वीर हो या वीरांगना
हार नहीं मानते,
गिरकर वापस उठने का
विचार है ठानते।
यूँ गिरना, पड़ना तो लगा रहेगा
विचलन का मार्ग तो सजा रहेगा,
विचलित होना विकल्प नहीं
अगर हार का संकल्प नहीं।
छल-कपट से भरी दुनिया में
खाओगे दर-दर धक्के,
मासूम-सी दिखती दुनिया की असलियत जान
रह जाओगे हक्के-बक्के।
पर डरना नहीं असलियत को देख
जिसे जानने को लगे हैं साल,
अकेले हो इस दुनिया में
बनानी होगी खुद की ढाल।
अंत में मरण ही है
तो क्यों डरे संसार से,
बड़े बनो इतने कि
खाए दुनिया तुम्हारे आहार से।
जो चूक गए तुम
दुनिया को आहार खिलाने से,
समझना कि ज़िंदगी बाकी है
समय है , देह और परमात्मा को मिलाने से।
जो अगर रोक दे कोई तुम्हें
तो उस शक्ति को याद करना तुम,
अकेले होने का ग़म न मनाना
आँखों में आँसू न भरना तुम।
बेखौफ़ होकर ज़िंदगी जी
खुद को अंदर से मार नहीं,
जीतना तो आख़री पड़ाव है ही
क्योंकि तेरे विकल्पों में हार नहीं।
— दिव्य डनसेना
हार कोई विकल्प नहीं,
जो हार गए तुम
अर्थात मन में जीत का संकल्प नहीं।
वीर हो या वीरांगना
हार नहीं मानते,
गिरकर वापस उठने का
विचार है ठानते।
यूँ गिरना, पड़ना तो लगा रहेगा
विचलन का मार्ग तो सजा रहेगा,
विचलित होना विकल्प नहीं
अगर हार का संकल्प नहीं।
छल-कपट से भरी दुनिया में
खाओगे दर-दर धक्के,
मासूम-सी दिखती दुनिया की असलियत जान
रह जाओगे हक्के-बक्के।
पर डरना नहीं असलियत को देख
जिसे जानने को लगे हैं साल,
अकेले हो इस दुनिया में
बनानी होगी खुद की ढाल।
अंत में मरण ही है
तो क्यों डरे संसार से,
बड़े बनो इतने कि
खाए दुनिया तुम्हारे आहार से।
जो चूक गए तुम
दुनिया को आहार खिलाने से,
समझना कि ज़िंदगी बाकी है
समय है , देह और परमात्मा को मिलाने से।
जो अगर रोक दे कोई तुम्हें
तो उस शक्ति को याद करना तुम,
अकेले होने का ग़म न मनाना
आँखों में आँसू न भरना तुम।
बेखौफ़ होकर ज़िंदगी जी
खुद को अंदर से मार नहीं,
जीतना तो आख़री पड़ाव है ही
क्योंकि तेरे विकल्पों में हार नहीं।
— दिव्य डनसेना
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Author:
Divya Dansena (
Offline) - Published: July 4th, 2026 11:35
- Comment from author about the poem: You’ll never lose if you don’t keep losing in your options .
- Category: Reflection
- Views: 1
- In collections: दिल से निकले , मुस्कुराते लफ़्ज़ ।।.

Offline)
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