छत्तीसगढ़

Divya Dansena

देश के बीच स्थित ऐसा प्रदेश
जो देश के दिल में है बसा,
जिस प्रदेश के नक्सल के नाम पर
हर कोई इस प्रदेश पर हँसा।

आधा समय चला जाता
इस प्रदेश के धान को सींचने में,
और आधा समय चला जाता
इसे उत्तर-दक्षिण की ओर खींचने में।

जहाँ एक समय में चली थी
श्रीराम की पावन सदी,
उसी प्रदेश के बीच से बहती
है पवित्र महानदी।

खेती को पूजा जाता यहाँ
उगता यहाँ असीम धान है,
वो धान ही इस प्रदेश की
आन, बान और शान है।

इस प्रदेश की महानता तो देखो
किसी को न रहने देता भूखा,
दूसरों की भूख खत्म करते-करते
ये खुद बेचारा रह गया सूखा।

जनजातियों के यहाँ समूह
आदिवासियों के यहाँ कबीले हैं,
पूरे देश के कोयले की पूर्ति कर दें
ऐसे भी यहाँ जिले हैं।

तीज यहाँ का ऐसा त्योहार
महिलाएँ मनाती इसे संग अपनी सहेली,
खेती के उपकरणों को जब पूजा जाए जब 
तो उस त्योहार को कहते हरेली।

इस प्रदेश के ऐसे जंगल जिन्हे
बनाते हैं हजारों प्राणी,
पर कुछ लालची लोग पहुँचा रहे
इन वनों को बहुत हानि।

राजिम में इसकी त्रिवेणी है
खुद का कुंभ है इसके अपने पास,
यहाँ वही कुंभ है जहाँ श्रद्धालु
संग लेट अपने बहुत सी आस।

श्री गणेश का गज
इस प्रदेश में कहीं था गिरा,
यह प्रदेश और कुछ नहीं
भारत का है अनोखा हीरा।

माँ बमलेश्वरी का डोंगरगढ़ यहाँ
36 की मात्रा में है यहाँ गढ़,
शान है मुझे यह कहने में कि
ये है मेरा छत्तीसगढ़।

— दिव्य डनसेना

  • Author: Divya Dansena (Online Online)
  • Published: July 7th, 2026 07:57
  • Comment from author about the poem: Sorry to say this . But I don’t think , and I know :- that there’s “no other state” better than mine . I know that it has been very much discriminated because of naxalism, but you can’t judge by just reading on newspapers. Actually, now nationalism has completely ended and there is no threat in my state. Please stop thinking that Chhattisgarh is dangerous. This poem is a reflection as well as a clarification to the thought that Chhattisgarh is unsafe.
  • Category: Nature
  • Views: 0
  • In collections: दिल से निकले , मुस्कुराते लफ़्ज़ ।।.


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