जो दर्द है मेरा वही मेरी दवा है

Anmol Sinha

जो दर्द है मेरा वही मेरी दवा है

किस बात की मुझको मिली ऐसी सज़ा है

 

चाहत है यही मैं भुला ही अब उसे दूं

पर वो है कि ऐसे मेरे दिल में बसा है

 

देखी नहीं उसने मेरी आहों की तपिश

जो देने लगा ज़ख्मों को मेरे हवा है

 

पर बात तो ऐसी कोई मैंने की नहीं

फिर यार हमारा यूं क्यों हमसे खफ़ा है

 

वो एक जो चेहरा मेरे दिल में है बसा

बाज़ार में चेहरा वही फिर से दिखा है

 

चेहरे से हटा दो अभी जुल्फ़ें ये ज़रा

क्यों चाँद सा मुखड़ा ये घटा में छुपा है

 

क्या क्या न सहे ज़ख्म यहां इश्क़ में हम

क्या जानता है तु, क्या ही तुझको पता है

 

बच इश्क़ की ज़हरीली तु राहों से ज़रा

इसमें ही यहां यार अभी तेरा भला है

 

हम तो वफ़ा के दीप जलाये खड़े हैं

पर दोस्त क्यों तूने सदा मुझको ठगा है।

 

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: July 19th, 2026 00:01
  • Category: Unclassified
  • Views: 0


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