जो बरहना आ गए बाज़ार में हम
इस तरह फिर छा गए बाज़ार में हम
(बरहना: नग्न/निवस्त्र)
तु छुपा था दिल के कोने में कहीं पर
ढूंढने क्यों आ गए बाज़ार में हम
मिल गया हमको सिला इस दोस्ती का
फिर से धोखा खा गए बाज़ार में हम
क्या कहें हम हाल अपना तुमसे अब फिर
क्या गया क्या पा गए बाज़ार में हम
खुद को अर्ज़ाँ बेच डाले तेरी ख़ातिर
क्या सितम ये ढा गए बाज़ार में हम।
(अर्ज़ाँ: मुफ़्त/सस्ते में)
अनमोल
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Author:
Anmol (Pseudonym) (
Online) - Published: July 28th, 2026 20:04
- Category: Unclassified
- Views: 0

Online)
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