क्या अब सुनने में मुझको आ रहा है

Anmol Sinha

क्या अब सुनने में मुझको आ रहा है

कि मुझको खोकर वो पछता रहा है

 

कल से जाने मुझको ये क्या हो गया

क्यों दिल अब मेरा बैठा जा रहा है

 

उसकी नज़रों से जब मैं गिर चुका हूं

क्यों अब मिलने से वो घबरा रहा है

 

कल हम दिल से बैठे थे भूल जिसे

वो क्यों ख्वाबों में मेरे आ रहा है

 

जिसने दानिस्ता हमको छोड़ दिया

अब वो क्यों नगमें मेरे गा रहा है।

 

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: August 3rd, 2026 21:23
  • Category: Unclassified
  • Views: 0


To be able to comment and rate this poem, you must be registered. Register here or if you are already registered, login here.