तुझसे उल्फ़त जो थी अब वो नहीं है

Anmol Sinha

तुझसे उल्फ़त जो थी अब वो नहीं है

वो एक आफ़त जो थी अब वो नहीं है

 

वो अपना कोई छूटा तो हुआ क्या?

वो एक ताक़त जो थी अब वो नहीं है

 

तू अब आए मिलने या फिर कि नहीं

वो एक हसरत जो थी अब वो नहीं है

 

कुछ भी था जो तेरा दीदार यहां

वो एक राहत जो थी अब वो नहीं है

 

हम रोज़ाना अब मिल लेते हैं भले

वो एक क़ुर्बत जो थी अब वो नहीं है

 

कह दो क्यों अब हम फिर ये इश्क़ करें

वो एक लज़्ज़त जो थी अब वो नहीं है

 

देखो उल्फ़त के अब मौसम हैं नये

वो एक उस्रत जो थी अब वो नहीं है ।

(उस्रत: तंगी/कठिनता)

 

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: August 19th, 2026 20:24
  • Category: Unclassified
  • Views: 2
Comments +

Comments1

  • sorenbarrett

    Change in one area promotes change in others. Good write



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