chandan

Zindgi

ए जिंदगी तेरा कोई वजूद नहीं ! 
मै हूँ तो तू है , 
मेरे होने के लिए तेरा होना जरुरी नहीं | 
ए जिंदगी तेरा कोई वजूद नहीं ! 
तुम्हे तो जब चाहु खत्म कर दुँ ,
और तुम तो चाह के भी नहीं | 
ए जींदगी तेरा कोई वजूद नही ! 
कभी मुङ तो पिछे देख तो सही , 
जिसके साथ तुम थे कभी वो तो आज भी है पर तुम नही | 
ए जिंदगी तेरा कोई वजूद नही ! 
तु मेरे बिना एक पल भी रह के दिखा , 
मै तो तुम्हारे बिना शदियो गुजारा कि नही |
ए जिंदगी तेरा कोई वजूद नहीं ! 
तुम तो गुलाम हो फिर भी पलको पे बिठाएँ रखता हुँ . 
शायद तुम्हे ये गुलामी पसंद नही , 
तुम्हारी ये जिद भी पुरा करता हूँ कि नही| 
ए जिंदगी तेरा कोई वजूद नहीं !

Comments1

  • Pintu Mahakul

    Life and life's perspectives are amazingly expressed in this beautiful poem.



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