दिल में किसी की याद को लाना फ़िज़ूल है

Anmol Sinha

दिल में किसी की याद को लाना फ़िज़ूल है                  बुझती हुई शमा को जलाना फ़िज़ूल है

 

वो शख्स बेवफ़ा है ये मालूम है मुझे                          उम्मीद कोई उससे लगाना फ़िज़ूल है

 

दिल में छुपी जो बात थी नज़रों ने की अयाँ                        अब राज़ कोई दिल में छुपाना फ़िज़ूल है

 

जब चाहो तुम बुला तो लो सीने से लो लगा                   तस्वीर मेरी दिल से लगाना फ़िज़ूल है

 

वो संगदिल समझता नहीं दिल की बात तो                      फिर अपने अश्क को यूं बहाना फ़िज़ूल है

 

रखना नहीं है जब तुम्हें कोई भी ताल्लुक                          फिर पन्नों में ये फूल दबाना फ़िज़ूल है

 

जब प्यार कोई दिल में तुम्हारे बचा नहीं                            तो बातों से ये फिक्र जताना फ़िज़ूल है

 

जब नींद से ये आँखें हमारी गईं हैं खुल                                तब ख्वाब कोई हम ही को दिखाना फ़िज़ूल है 

 

अब यार पास बैठो शिकायतें खत्म करो                      बेकार में अब बात बढ़ाना फ़िज़ूल है

 

'अनमोल' तुम ग़ज़ल से ही अपनी बयां करो                       यूं दिल में अपना दर्द छुपाना फ़िज़ूल है

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: October 17th, 2025 10:16
  • Category: Unclassified
  • Views: 9
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