हुए दूर फिर हम क़रीब आते-आते
बिछड़ने लगे तुम क़रीब आते-आते
बड़ी मुश्किलों से मनाया था तुमको
हुए फिर से बरहम क़रीब आते-आते
सताना मनाना ये अपनी जगह है
यूं रूठो न जानम क़रीब आते-आते
वो दिन थे कि फूलों पे शबनम सजी थी
क्यों बदले हैं मौसम क़रीब आते-आते
चले साथ मंज़िल के जानिब थे दोनों
कहां हम कहां तुम क़रीब आते-आते l
अनमोल
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Author:
Anmol (Pseudonym) (
Offline) - Published: January 26th, 2026 06:28
- Category: Unclassified
- Views: 0

Offline)
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