जाने मैं कहाँ चला आया
जाने मंज़िल क्या मेरी है
जीवन को हर पल ढूँढ रहा
जाने कहाँ मेरी रोशनी है
अपने तो हैं पर अपना नही
मंज़िल तो है पर राह नही
दर्द बहुत है आह नही
जीता तो हूँ पर चाह नही
तुम क्यूँ मेरा विश्वास करो
तुम क्यूँ मुझको यूँ प्यार करो
पत्थर बस ठोकर खाता है
तेरा सजनी नही दोष कोई
-विमल
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Author:
विमल (Pseudonym) (
Offline) - Published: March 24th, 2026 06:13
- Category: Unclassified
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- In collections: StillLovingYou.

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