ख़ुशियाँ तू दो पैसे की होती तो मैं तुझको ले आता

Waiting for Silence

कहाँ तलाशूँ मैं तुझको कौन जहाँ में पा लूँगा

कौन दिशा में बसती हो और  कैसा रूप है तेरा बता

कितने बरसों से ढूँढ रहा कितना मैं तरस चुका हूँ अब

अब तो आजाओ तेरी मैं दिन रात प्रतीक्षा करता हूँ

 

कौन नगर में बस्ती हो कुछ अपना पता बता दो अब

ग़र दूकानों में बिकती हो मुझको वो जगह बता दो अब

तेरा कोई बीज अगर होता मैं खेती तेरी कर लेता

एकड़ दो एकड़ उपजा कर मैं दुनिया को खुश कर लेता

 

मेरा अंतर सूना है मैं तुझको खोजने निकला हूँ

हाँ बेहद टूट गया मैं अब तुम आकर गले लगा लो ना  

कोई है? जिसने ख़ुशियों को देखा मुझको भी तो बतलाता

ख़ुशियाँ तू दो पैसे की होती तो मैं तुझको ले आता

-विमल

  • Author: विमल (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: April 7th, 2026 02:09
  • Category: Sad
  • Views: 2
  • In collections: Pain.
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