पुकार
बूढ़ा ये राष्ट्र हुआ है अब
हर ओर निराशा छायी है
भारत माँ के मुख पर फिरसे
गहन उदासी आयी है
पुत्रे कुपुत्र हुए इसके
आपस में ही लड़ मरते हैं
भूल रहे हर एक मौत
माता का दर्द बढ़ाती है
हे भारत के युवा वर्ग
हिंद तुझे देता पुकार
चल भूमि का उद्धार तू कर
माता तेरी तू उसका है
गर भारत है तो तू भी है
अस्तित्व हीन गर हिंद नहीं
मिटा स्वयं को माटी पर
मिट कर ही हिना रंग देती है
इतिहास तेरा गौरवशाली
देवों की तू संतान है
दे भारत को नवजीवन की
कल का भारत भी गर्व करे
जड़ता में चेतना ला दे तू
पत्थर को हे पिघला दे तू
तुझमें हिम्मत तुझमें धीरज
माता का कर्ज चुका दे तू
वक्त तेरा है तू उसका नहीं
ले चल इसको तू अपने संग
उठ हिम्मत कर तू आगे बढ़
इस देश का उन्नत मस्तक कर
— विमल
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Author:
विमल (Pseudonym) (
Offline) - Published: April 25th, 2026 01:00
- Category: Unclassified
- Views: 2

Offline)
Comments1
A call to awaken the youth who hàve forgotten their responsibility .
Nicely done .
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